डिबेंचर (Debenture): अर्थ, विशेषताएं और प्रकार।

Read in English:

हर व्यवसाय को चलाने के लिए फंडिंग की ज़रूरत होती है, क्योंकि इसके बिना व्यवसाय का संचालन नामुमकिन हैं। व्यवसाय अपनी ज़रूरतों और पात्रता के हिसाब से अलग-अलग स्रोतों से फंड जुटाते हैं, जैसे पूंजी, ऋण, शेयर, बांड, डिबेंचर, आदि और इन अलग-अलग स्रोतों में से, डिबेंचर एक स्रोत है, और इसमें कुछ ऐसी खासियतें होती हैं जो इसे दूसरों से अलग बनाती हैं।

डिबेंचर आम तौर पर कंपनियाँ (पब्लिक और प्राइवेट) और सरकार, संबंधित कानून, जैसे कंपनी कानून, आदि के कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए जारी करती हैं। फंड जुटाने का यह तरीका एकल-स्वामित्व, साझेदारी फर्म, आदि जैसे दूसरे तरह के व्यावसायिक रूप में उपलब्ध नहीं है। ध्यान दें: प्राइवेट कंपनियाँ सीधे जनता को डिबेंचर जारी करने के लिए योग्य नहीं हैं; वे केवल निजी तौर पर डिबेंचर आबंटन कर सकते हैं।

डिबेंचर (Debenture): अर्थ, विशेषताएं और प्रकार।

डिबेंचर (Debenture) क्या है?

डिबेंचर एक कानूनी दस्तावेज़ है जिसका इस्तेमाल निवेशकों से फंड जुटाने के लिए किया जाता है, और यह व्यवसाय के लिए एक दीर्घकालिक कर्ज़ होता है क्योंकि व्यवसाय इसे जारी करते समय तय की गई शर्तों के अनुसार चुकाने के लिए बाध्य होता है। क्योंकि यह व्यवसाय के लिए एक कर्ज़ है, इसलिए इसे लेखांकन की पुस्तकों में दर्ज किया जाता है और बैलेंस शीट के देनदारी पक्ष में, दीर्घकालिक देनदारियों के तहत दिखाया जाता है।

जो डिबेंचर रखता है, उसे डिबेंचर होल्डर कहा जाता है और उसे शर्तों के अनुसार तय दर पर ब्याज मिलता है और मैच्योरिटी के समय मूल धन मिलता है। मैच्योरिटी की तारीख और ब्याज दर डिबेंचर एग्रीमेंट में इसे जारी करते समय बताई जाती है। ध्यान दें: डिबेंचर होल्डर्स के पास शेयरहोल्डर्स की तरह व्यवसाय में वोट का अधिकार नहीं होता है, लेकिन डिबेंचर के प्रकार इसे प्रभावित कर सकते हैं।

इसके व्यवसाय और निवेशक दोनों के लिए फायदे हैं। व्यवसाय के लिए, यह शेयर (स्वामित्व) डाइल्यूशन से बचने का एक तरीका है, और निवेशक के लिए, यह शेयरों से ज़्यादा सुरक्षित है और उन्हें समय के साथ एक निश्चित ब्याज आय देता है और डिबेंचर होल्डर्स को अपने डिबेंचर किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित करने का अधिकार भी प्रदान होता है, लेकिन कुछ कानूनी औपचारिकता पूरी करने की आवश्यकता होती है।

डिबेंचर का व्यापार शेयरों की तरह ही होता है। अगर कंपनी लिस्टेड है, तो इसका व्यापार शेयर बाज़ार में होता है, लेकिन अगर लिस्टेड नहीं है, तो इसका व्यापार मैन्युअल रूप से किया जाता है, और इसका व्यापार संबंधित कानूनों और शासी निकाय (जैसे स्टॉक एक्सचेंज बोर्ड, मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन, आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन, आदि) द्वारा विनियमित की जाती है। यदि डिबेंचर परिवर्तनीय डिबेंचर की श्रेणी में आता है, तो इसे इक्विटी शेयरों में बदला जा सकता है।


डिबेंचर की विशेषताएं (Features of a Debenture)

डिबेंचर की विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

1. साधन (Instrument):

डिबेंचर एक वित्तीय साधन है जिसका इस्तेमाल कंपनियां और सरकारी संस्थाएं बाजार में निवेशकों से फंड जुटाने के लिए करती हैं, जिसके बदले में एक तय इंटरेस्ट रेट और एक तय मैच्योरिटी डेट पर मूल राशि का रीपेमेंट किया जाता है। हर डिबेंचर का एक विशिष्ट पहचान संख्या होता है, जो उसे दूसरों से अलग करता है और उसके मैनेजमेंट को आसान बनाता है।

2. शासित (Governed):

डिबेंचर संबंधित कानूनों और शासी निकाय जैसे स्टॉक एक्सचेंज बोर्ड, व्यवसाय के MOA और AOA, अदि द्वारा नियंत्रित होता है। इसे नियंत्रित इसलिए किया जाता है क्योंकि यह फंड जुटाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक वित्तीय साधन है और इसका शासन निवेशक के अधिकारों की रक्षा करता है और टिकाऊ और नियंत्रित निवेश सुनिश्चित करता है। यह डिबेंचर में निवेश करने के लिए निवेशक का भरोसा बढ़ाने में मदद करता है।

3. सुरक्षित (Secured):

डिबेंचर शेयर से ज़्यादा सुरक्षित होता है क्योंकि डिबेंचर अपने धारक को नियमित आय देता है, क्योंकि यह निश्चित ब्याज दर पर जारी किया जाता है (चल दर डिबेंचर को छोड़कर) और मैच्योरिटी पर धारक को मूल राशि भी वापस किया जाता है। कंपनी बंद होने के समय भी डिबेंचर होल्डर को प्राथमिकता मिलती है। कई कारणों से यह दूसरे साधन की तुलना में ज़्यादा सुरक्षित साधन है।

4. दायित्व (Liability):

डिबेंचर व्यवसाय के लिए एक देनदारी है और यह एक दीर्घकालिक देनदारी है क्योंकि यह एक कर्ज़ है और इसे आमतौर पर एक साल से ज़्यादा समय के लिए जारी किया जाता है। इसे किताबों में दर्ज किया जाता है और व्यवसाय के फाइनल अकाउंट जैसे बैलेंस शीट और दूसरी रिपोर्ट्स में दिखाया जाता है। बैलेंस शीट में इसे दीर्घकालिक देनदारी के तहत देनदारी पक्ष में दिखाया जाता है। ध्यान दें: जब तक इसे चुका नहीं दिया जाता, यह व्यवसाय के लिए देनदारी बनी रहती है।

5. प्राथमिकता (Preference):

व्यवसाय बंद होने के समय डिबेंचर धारक को प्राथमिकता मिलती है क्योंकि व्यवसाय बंद होने के समय सबसे पहले दीर्घकालिक देनदारी का भुगतान किया जाता है फिर बाकि का भुगतान किया जाता है और डिबेंचर दीर्घकालिक देनदारी में आता है। यह शेयर (इक्विटी और प्रेफरेंस) जैसे दूसरे तरह के साधनों की तुलना में ज़्यादा सुरक्षित होता है।

6. वर्गीकृत (Classified):

डिबेंचर को विभिन्न प्रकार में बांटा गया है, जैसे कि संचयी डिबेंचर (Cumulative Debenture), गैर-संचयी डिबेंचर (Non-cumulative Debenture), मोचनीय डिबेंचर (Redeemable Debenture), गैर-मोचनीय डिबेंचर (Non-redeemable Debenture), परिवर्तनीय डिबेंचर (Convertible Debenture), आंशिक परिवर्तनीय डिबेंचर (Partly Convertible Debenture), गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (Non-convertible Debenture), पंजीकृत डिबेंचर (Registered Debenture), अपंजीकृत डिबेंचर (Unregistered Debenture), आदि और हर प्रकार की अपनी खासियतें होती हैं जो उसे दूसरों से अलग बनाती हैं।

7. हस्तांतरणीय (Transferable):

डिबेंचर हस्तांतरणीय होते हैं, जिसका मतलब है कि डिबेंचर धारक अपने हिस्से के डिबेंचर दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित कर सकते हैं और इसे हस्तांतरित करने से इसके अस्तित्व पर कोई असर नहीं पड़ता। यह अपनी मैच्योरिटी तिथि तक मौजूद रहता है, लेकिन अगर यह गैर-मोचनीय डिबेंचर है, तो यह व्यवसाय के अस्तित्व तक मौजूद रहता है। आम तौर पर डिबेंचर लंबी अवधि के लिए जारी किए जाते हैं, जैसे 5 साल, 10 साल, 20 साल, आदि, इसीलिए यह देर से मैच्योर होते हैं।

8. मतदान अधिकार नहीं (No Voting Rights):

डिबेंचर धारक को व्यवसाय में कोई भी वोट का अधिकार और हिस्सेदारी का अधिकार नहीं मिलता है, जैसे कि सालाना जनरल मीटिंग में वोट करना, मैनेजेरियल कामों में हिस्सा लेना, आदि। ऐसा इसलिए है क्योंकि डिबेंचर व्यवसाय के लिए एक कर्ज़ होता है और इसे जारी करने के लिए व्यवसाय को शेयर की तरह व्यवसाय का कोई हिस्सा देने की ज़रूरत नहीं होती है। डिबेंचर धारक को सिर्फ़ तय समय पर ब्याज़ और मूल रकम मिलती है।


डिबेंचर के प्रकार (Types of Debentures)

डिबेंचर के प्रकार निम्नलिखित हैं:

संचयी डिबेंचर (Cumulative Debenture)ब्याज मैच्योरिटी तक जमा होता रहता है।
गैर-संचयी डिबेंचर (Non-cumulative Debenture)ब्याज मैच्योरिटी तक जमा नहीं होता है।
मोचनीय डिबेंचर (Redeemable Debenture)मैच्योरिटी के बाद व्यवसाय इसे वापस ले लेता है।
गैर-मोचनीय डिबेंचर (Non-redeemable Debenture)व्यवसाय बंद होने तक इसे वापस नहीं लिया जाता है।
परिवर्तनीय डिबेंचर (Convertible Debenture)डिबेंचर को इक्विटी शेयरों में परिवर्तन किया जा सकता है।
आंशिक परिवर्तनीय डिबेंचर (Partly Convertible Debenture)डिबेंचर को आंशिक रूप से इक्विटी शेयरों में बदला जा सकता है।
गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (Non-convertible Debenture)डिबेंचर को इक्विटी शेयरों में परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
पंजीकृत डिबेंचर (Registered Debenture)डिबेंचर, डिबेंचर धारक के नाम पर रजिस्टर्ड होता है।
अपंजीकृत डिबेंचर (Unregistered Debenture)डिबेंचर, डिबेंचर होल्डर के नाम पर रजिस्टर्ड नहीं होता है।

1. संचयी डिबेंचर (Cumulative Debenture):

संचयी डिबेंचर, डिबेंचर का एक ऐसा रूप है जिसमें ब्याज इसके मैच्योरिटी या तय समय तक जमा होता रहता है और दूसरे तरह के डिबेंचर की तरह इसमें बार-बार ब्याज का भुगतान नहीं किया जाता है।

2. गैर-संचयी डिबेंचर (Non-cumulative Debenture):

गैर-संचयी डिबेंचर एक तरह के डिबेंचर होते हैं जिनमें मैच्योरिटी या तय तारीख तक ब्याज जमा नहीं होता, और ब्याज का पेमेंट समय-समय पर किया जाता है, जैसे कि तिमाही, छमाही, सालाना, या किसी तय तारीख पर।

3. मोचनीय डिबेंचर (Redeemable Debenture):

मोचनीय डिबेंचर एक तरह के डिबेंचर होते हैं जहाँ व्यवसाय मैच्योरिटी की तारीख पर डिबेंचर को रिडीम करता है या एक तय समय के अंदर उन्हें वापस खरीद लेता है। अगर अर्ली रिडेम्पशन का फीचर उपलब्ध है, तो व्यवसाय ज़रूरत पड़ने पर उन्हें पहले भी रिडीम कर सकता है।

4. गैर-मोचनीय डिबेंचर (Non-redeemable Debenture):

गैर-मोचनीय डिबेंचर एक तरह के डिबेंचर होते हैं जहाँ व्यवसाय अपने अस्तित्व तक डिबेंचर को रिडीम नहीं करता है, या आसान शब्दों में कहें तो इसकी कोई मैच्योरिटी तारीख नहीं होती है। इसे तभी रिडीम किया जाता है जब व्यवसाय बंद हो जाता है और यह मोचनीय डिबेंचर के बिल्कुल उल्टा होता है।

5. परिवर्तनीय डिबेंचर (Convertible Debenture):

परिवर्तनीय डिबेंचर एक तरह का डिबेंचर होता है जिसमें डिबेंचर को इक्विटी शेयर में बदला जा सकता है। इस तरह के डिबेंचर उन लोगों को अधिक पसंद आते हैं जो भविष्य में कंपनी के इक्विटी शेयर पाना चाहते हैं और यह अपनी परिवर्तनीयता की वजह से दूसरे तरह के डिबेंचर की तुलना में ज़्यादा लचीला होता है।

6. आंशिक परिवर्तनीय डिबेंचर (Partly Convertible Debenture):

आंशिक परिवर्तनीय डिबेंचर एक तरह के डिबेंचर होते हैं जिसमें डिबेंचर का एक हिस्सा इक्विटी शेयरों में बदला जा सकता है। इस तरह के डिबेंचर उन निवेशकों के लिए कुछ हद तक आकर्षक होते हैं जो भविष्य में कंपनी के इक्विटी शेयर खरीदना चाहते हैं, और यह अपनी आंशिक परिवर्तनीय की वजह से नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर की तुलना में थोड़ा ज़्यादा लचीला होता है।

7. गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (Non-convertible Debenture):

गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर एक तरह के डिबेंचर होते हैं जिन्हें इक्विटी शेयरों में परिवर्तन नहीं किया जा सकता। इस तरह के डिबेंचर उन निवेशकों के लिए कम आकर्षक होते हैं जो भविष्य में कंपनी के इक्विटी शेयर खरीदना चाहते हैं, और इसकी गैर-परिवर्तनीय इसे परिवर्तनीय डिबेंचर की तुलना में कम लचीला बनाती है।

8. पंजीकृत डिबेंचर (Registered Debenture):

पंजीकृत डिबेंचर एक तरह के डिबेंचर होते हैं जिसमे डिबेंचर धारक की ओनरशिप कंपनी की किताबों में दर्ज की जाती है, जिसके कारण यह अनरजिस्टर्ड डिबेंचर की तुलना में ज़्यादा सुरक्षित होते हैं। इनके स्थानान्तरण के लिए कानूनी दस्तावेज़ीकरण पूरा करना ज़रूरी होता है। डिबेंचर पर मिलने वाला ब्याज सीधे पंजीकृत डिबेंचर धारक के खाता में दिया जाता है।

9. अपंजीकृत डिबेंचर (Unregistered Debenture):

अपंजीकृत डिबेंचर एक तरह के डिबेंचर होते हैं, जिन्हें बेयरर डिबेंचर भी कहा जाता है, जिसमें डिबेंचर धारक की ओनरशिप कंपनी की किताबों में दर्ज नहीं होती है, इस वजह से ये पंजीकृत डिबेंचर की तुलना में कम सुरक्षित होते हैं। इनके स्थानान्तरण के लिए किसी कानूनी दस्तावेज़ीकरण की ज़रूरत नहीं होती है, क्योंकि जिसके पास भी ये होते हैं, उसे ही मालिक माना जाता है। इन डिबेंचर पर ब्याज सीधे डिबेंचर धारक के खाता में दिया जाता है।


यह भी पढ़ें:


QNA/FAQ

Q1. डिबेंचर क्या है?

Ans: डिबेंचर एक ऐसा साधन है जिसका इस्तेमाल बाजार में निवेशक से फंड जुटाने के लिए किया जाता है और यह व्यवसाय के लिए एक दीर्घकालिक कर्ज़ होता है और समय के साथ इस पर निश्चित दर से इंब्याज देना होता है।

Q2. डिबेंचर जारी करने का अधिकार किसे है?

Ans: कंपनियों और सरकारी निकायों को डिबेंचर जारी करने का अधिकार है।

Q3. क्या डिबेंचर दीर्घकालिक होता है या अल्पकालिक?

Ans: डिबेंचर दीर्घकालिक होता है।

Q4. डिबेंचर के प्रकार लिखिए।

Ans: डिबेंचर के प्रकार निम्नलिखित हैं:

1. संचयी डिबेंचर (Cumulative Debenture)
2. गैर-संचयी डिबेंचर (Non-cumulative Debenture)
3. मोचनीय डिबेंचर (Redeemable Debenture)
4. गैर-मोचनीय डिबेंचर (Non-redeemable Debenture)
5. परिवर्तनीय डिबेंचर (Convertible Debenture)
6. आंशिक परिवर्तनीय डिबेंचर (Partly Convertible Debenture)
7. गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (Non-convertible Debenture)
8. पंजीकृत डिबेंचर (Registered Debenture)
9. अपंजीकृत डिबेंचर (Unregistered Debenture)

Q5. डिबेंचर की विशेषताएं लिखिए।

Ans: डिबेंचर की विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

1. डिबेंचर एक वित्तीय साधन है।
2. डिबेंचर एक दीर्घकालिक कर्ज़ है।
3. डिबेंचर व्यवसाय के लिए एक देनदारी है।
4. डिबेंचर शेयर डाइल्यूशन को रोकते हैं।
5. डिबेंचर कानून द्वारा नियंत्रित होते हैं।
6. डिबेंचर एक सुरक्षित निवेश है।
7. डिबेंचर धारक को प्राथमिकता मिलती है।
8. डिबेंचर अलग-अलग प्रकार के होते हैं।
9. डिबेंचर धारक को वोट का अधिकार नहीं मिलता है।
10. डिबेंचर धारक को निश्चित दर पर ब्याज मिलता है।
11. डिबेंचर धारक को मैच्योरिटी पर मूल राशि मिलती है।
12. डिबेंचर को बैलेंस शीट पर दिखाया जाता है।
13. डिबेंचर हस्तांतरणीय होते हैं।

Leave a Reply